कंट्रोल प्रिंट: क्या सभी चिंताएं कीमत में शामिल हैं?
कंट्रोल प्रिंट का स्टॉक पिछले वर्ष से कमजोर रहा है। भारत में कोडिंग और मार्किंग बिज़नेस में सुस्ती और पैकेजिंग सेगमेंट में डाइवर्सिफिकेशन ने निवेश पर तत्काल रिटर्न नहीं दिया। हालांकि मैनेजमेंट के अनुसार FY26 में अंतरराष्ट्रीय कारोबार घाटे से बाहर आ सकता है।
भारत में स्टैंडअलोन बिजनेस में पहली तीन तिमाहियों में सॉफ्ट परफॉर्मेंस रहा। इंडस्ट्रियल सेगमेंट पर ज़्यादा निर्भरता (जैसे केबल्स, सीमेंट आदि) और नए प्रोडक्ट लॉन्च की वजह से कंज्यूमेबल सेल्स में कमी आई।
मार्जिन में गिरावट का मुख्य कारण लो-मार्जिन प्रिंटर्स का ज़्यादा हिस्सा और V Shapes तथा Track & Trace प्रिंटर्स के लिए बनी टीम पर खर्च है। हालांकि कंज्यूमेबल्स की निरंतर बिक्री से मार्जिन को सपोर्ट मिलेगा।
V Shapes जैसी अंतरराष्ट्रीय यूनिट्स ने घाटा दिया है, जबकि Markprint और Codeology ने ब्रेक ईवन किया है। V Shapes के FY26 में ब्रेक ईवन होने की उम्मीद है। UAE में नया सब्सिडियरी स्थापित किया गया है।
COVID के बाद उत्पादों की पैकेजिंग ज़रूरी हो गई है। भारत में दवाओं पर QR कोड अनिवार्य किया गया है। इससे कोडिंग और मार्किंग मशीनों की मांग बढ़ेगी। कंपनी ने हाल ही में QRiousCodes लॉन्च किया है।
कंट्रोल प्रिंट का कोर बिजनेस मज़बूत है और बैलेंस शीट बेहतर है। FY26 में प्रदर्शन में सुधार स्टॉक के लिए अहम रहेगा। यह स्टॉक सिर्फ लंबी अवधि के जोखिम उठाने वाले निवेशकों के लिए उपयुक्त है।